व्यंजन संधि (Vyanjan Sandhi) – परिभाषा, नियम, प्रकार और उदाहरण

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स्वर संधि के बाद व्यंजन संधि हिंदी व्याकरण का दूसरा महत्वपूर्ण भाग है। बोर्ड परीक्षाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं और विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में व्यंजन संधि से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। पहली बार पढ़ने वाले विद्यार्थियों को इसके नियम कठिन लग सकते हैं, लेकिन यदि प्रत्येक नियम को क्रमवार समझा जाए तो यह विषय बहुत आसान हो जाता है।

इस अध्याय में हम व्यंजन संधि को सरल भाषा, नई तालिकाओं, नए उदाहरणों और याद रखने की आसान ट्रिक्स के साथ समझेंगे।

व्यंजन संधि क्या है? (Vyanjan sandhi kise kahate hain)

जब किसी शब्द का अंतिम वर्ण व्यंजन हो और उसके बाद आने वाले शब्द के पहले वर्ण (स्वर या व्यंजन) से मिलकर उसमें परिवर्तन हो जाए, तब उस परिवर्तन को व्यंजन संधि कहते हैं।

सरल शब्दों में

व्यंजन के साथ स्वर या व्यंजन के मिलने से जो ध्वनि परिवर्तन होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं।

व्यंजन संधि को समझें

उदाहरण (Vyanjan sandhi ke udaharan)

सत् + कर्म = सत्कर्म

यहाँ पहले शब्द का अंतिम वर्ण त् है। दूसरे शब्द का पहला वर्ण है। दोनों मिलकर नया शब्द बनाते हैं।

इसी प्रकार—

जगत् + गुरु = जगद्गुरु

यहाँ त् बदलकर द् हो गया।

व्यंजन संधि की विशेषताएँ

  • इसमें परिवर्तन व्यंजनों में होता है।
  • कभी पहला व्यंजन बदलता है।
  • कभी दूसरा व्यंजन बदलता है।
  • कई बार दोनों वर्ण नया रूप ले लेते हैं।
  • सही उच्चारण के लिए यह परिवर्तन आवश्यक होता है।

व्यंजन संधि के प्रमुख नियम (Vyanjan sandhi ke niyam)

व्यंजन संधि के अनेक नियम हैं, लेकिन विद्यालय स्तर पर कुछ मुख्य नियम अधिक महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

नियम 1

क्, च्, ट्, त्, प् का परिवर्तन

यदि इन व्यंजनों के बाद वर्ग का तीसरा, चौथा या पाँचवाँ वर्ण अथवा य, र, ल, व या कोई स्वर आए, तो पहला व्यंजन अपने वर्ग के तीसरे वर्ण में बदल जाता है।

तालिका

पहले बदलकर
क् ग्
च् ज्
ट् ड्
त् द्
प् ब्

नए उदाहरण

मूल शब्द नया शब्द
जगत् + गुरु जगद्गुरु
जगत् + ईश्वर जगदीश्वर
तत् + अर्थ तदर्थ
तत् + अनुरूप तदनुरूप
अप् + ज अब्ज

याद रखने की ट्रिक

क-च-ट-त-प → ग-ज-ड-द-ब

नियम 2

नासिक्य वर्ण आने पर परिवर्तन

यदि क्, च्, ट्, त् या प् के बाद उसी वर्ग का नासिक्य वर्ण आए, तो पहला वर्ण उसी नासिक्य वर्ण में बदल जाता है।

उदाहरण

मूल शब्द संधि
उत् + नयन उन्नयन
उत् + मूलन उन्मूलन
षट् + मास षण्मास
प्राक् + मुख प्राङ्मुख
वाक् + मय वाङ्मय

याद रखने की ट्रिक

नासिक्य वर्ण दिखे तो पहला वर्ण उसी जैसा बन जाएगा।

नियम 3

त् का द् बनना

यदि त् के बाद ग, घ, द, ध, ब, भ, य, र, व या कोई स्वर आए, तो त् → द् हो जाता है।

नए उदाहरण

मूल शब्द नया शब्द
भगवत् + भक्ति भगवद्भक्ति
सत् + भावना सद्भावना
तत् + रूप तद्रूप
तत् + योग तद्योग
जगत् + आधार जगदाधार

नियम 4

त् का समान व्यंजन में बदलना

यदि त् के बाद च, ज, झ, ट, ड या ल आए, तो त् उसी के अनुसार बदल जाता है।

उदाहरण

मूल शब्द संधि
उत् + चारण उच्चारण
सत् + जन सज्जन
उत् + डयन उड्डयन
उत् + लास उल्लास
तत् + लीन तल्लीन

परीक्षा में सबसे अधिक पूछे जाने वाले शब्द

  • सज्जन
  • उच्चारण
  • उल्लास
  • तल्लीन
  • उड्डयन

नियम 5

त् + श

यदि त् के बाद आए, तो दोनों बदलकर च्छ बन जाते हैं।

उदाहरण

मूल शब्द नया शब्द
उत् + श्वास उच्छ्वास
उत् + शिष्ट उच्छिष्ट
सत् + शास्त्र सच्छास्त्र

ट्रिक

त और श मिलकर छ की ध्वनि बनाते हैं।

नियम 6

त् + ह

यदि त् के बाद आए, तो

त् → द्

ह → ध

उदाहरण

मूल शब्द संधि
उत् + हार उद्धार
उत् + हरण उद्धरण
तत् + हित तद्धित

नियम 7

स्वर + छ

यदि किसी स्वर के बाद आए तो उसके पहले जुड़ जाता है।

उदाहरण

मूल शब्द नया शब्द
अनु + छेद अनुच्छेद
आ + छादन आच्छादन
स्व + छंद स्वच्छंद
संधि + छेद संधिच्छेद

नियम 8

म् का अनुस्वार बनना

यदि म् के बाद कोई वर्गीय व्यंजन आए तो म् की जगह अनुस्वार (ं) लिखा जाता है।

उदाहरण

मूल शब्द संधि
सम् + कल्प संकल्प
सम् + चय संचय
सम् + तोष संतोष
सम् + पूर्ण संपूर्ण
सम् + बंध संबंध

विद्यार्थी ध्यान रखें

आज की मानक हिंदी में—

सम्पूर्ण और संपूर्ण दोनों रूप मिलते हैं, लेकिन आधुनिक लेखन में संपूर्ण अधिक प्रचलित है।

नियम 9

म् + म

यदि म् के बाद पुनः म आए तो दोनों मिलकर म्म बनाते हैं।

उदाहरण

मूल शब्द नया शब्द
सम् + मान सम्मान
सम् + मति सम्मति
सम् + मिश्रण सम्मिश्रण

नियम 10

म् + य, र, ल, व, श, स

यदि म् के बाद इन वर्णों में से कोई आए तो म् के स्थान पर अनुस्वार (ं) लिखा जाता है।

उदाहरण

मूल शब्द संधि
सम् + योग संयोग
सम् + रक्षा संरक्षण
सम् + विधान संविधान
सम् + लग्न संलग्न
सम् + संसार संसार

नियम 11

न का ण बनना

यदि किसी शब्द में पहले , या हो और बाद में आए तो न बदलकर ण हो जाता है।

उदाहरण

मूल शब्द नया शब्द
परि + नाम परिणाम
प्र + मान प्रमाण
राम + अयन रामायण
नार + अयन नारायण

नियम 12

स का ष बनना

कुछ विशेष परिस्थितियों में बदलकर हो जाता है।

उदाहरण

मूल शब्द संधि
वि + सम विषम
अभि + सेक अभिषेक
नि + सिद्ध निषिद्ध
अनु + संग अनुषंग

व्यंजन संधि की पूरी झलक

नियम मुख्य परिवर्तन उदाहरण
1 क→ग, त→द आदि जगद्गुरु
2 नासिक्य परिवर्तन उन्मूलन
3 त→द सद्भावना
4 त→ज्ज/ल्ल आदि सज्जन
5 त + श → छ्छ उच्छ्वास
6 त + ह → द्ध उद्धार
7 स्वर + छ अनुच्छेद
8 म् → अनुस्वार संकल्प
9 म् + म सम्मान
10 म् + य आदि संविधान
11 न → ण परिणाम
12 स → ष अभिषेक

विद्यार्थी अक्सर ये गलतियाँ करते हैं

❌ हर “ं” वाले शब्द को व्यंजन संधि मान लेना।

❌ संधि और समास में भ्रम करना।

❌ त् और द् के परिवर्तन का नियम भूल जाना।

❌ केवल शब्द रट लेना, नियम न समझना।

अभ्यास प्रश्न (Vyanjan sandhi worksheet)

संधि का प्रकार बताइए

  1. जगद्गुरु
  2. सद्भावना
  3. संकल्प
  4. अनुच्छेद
  5. तल्लीन
  6. सज्जन
  7. संरक्षण
  8. परिणाम
  9. अभिषेक
  10. सम्मान

संधि-विच्छेद कीजिए

  1. जगदीश्वर
  2. जगद्गुरु
  3. संपूर्ण
  4. संरक्षण
  5. अनुच्छेद
  6. सद्भावना
  7. अभिषेक
  8. परिणाम
  9. तल्लीन
  10. उच्छ्वास

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) (Vyanjan sandhi worksheet)

1. “सज्जन” में कौन-सी संधि है?

(A) स्वर संधि
(B) व्यंजन संधि
(C) विसर्ग संधि
(D) दीर्घ संधि

उत्तर: (B)

2. “उद्धार” का सही संधि-विच्छेद क्या है?

(A) उत् + हार
(B) उद् + हार
(C) उत + हार
(D) उ + हार

उत्तर: (A)

3. “संकल्प” में “म्” किसमें बदला है?

(A) द्

(B) अनुस्वार

(C) ण

(D) ल

उत्तर: (B)

4. “अनुच्छेद” किस संधि का उदाहरण है?

(A) व्यंजन संधि

(B) स्वर संधि

(C) विसर्ग संधि

(D) वृद्धि संधि

उत्तर: (A)

5. “रामायण” में कौन-सा परिवर्तन हुआ है?

(A) न → ण

(B) त → द

(C) स → ष

(D) म → ं

उत्तर: (A)

अध्याय का सार

  • व्यंजन संधि में परिवर्तन व्यंजनों के मेल से होता है।
  • त्, म्, न, स आदि के परिवर्तन वाले नियम सबसे अधिक पूछे जाते हैं।
  • यदि नियम समझ लिए जाएँ तो संधि-विच्छेद करना बहुत आसान हो जाता है।
  • अभ्यास के साथ विद्यार्थी व्यंजन संधि में पूर्ण दक्षता प्राप्त कर सकते हैं।

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